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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
आचार्य नरेन्द्र देव जी के शिक्षा का माध्यम तथा अनुशासन संबंधी विचारों का अध्ययन तथा उसकी सार्थकता
Authors
महेन्द्र प्रताप सिंह पटेल, डॉ. रूपाली
Abstract
प्रस्तुत शोध में आचार्य नरेन्द्रदेव जी के शिक्षा का माध्यम तथा अनुशासन संबंधी विचारों का अध्ययन तथा उसकी सार्थकता को प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुत शोध का उद्देश्य आचार्य नरेन्द्रदेव जी के अनुसार शिक्षा के माध्यम का अध्ययन करना तथा आचार्य नरेन्द्रदेव जी के अनुसार अनुशासन के सम्बन्ध में विचारों का अध्ययन करना।
वर्तमान अध्ययन आचार्य नरेन्द्रदेव जी के ग्रन्थों, लेखों तथा अन्य स्रोतों के आधार पर उनके शिक्षा का माध्यम तथा अनुशासन संबंधी विचारों को सुव्यवस्थित किया गया। प्रस्तुत अध्ययन में ऐतिहासिक अनुसंधान विधि को चुना गया। प्रस्तुत अध्ययन में आचार्य नरेन्द्रदेव जी द्वारा रचित विभिन्न पुस्तकांे, लेखों, पत्रों तथा आचार्य नरेन्द्रदेव जी के बारे में विभिन्न विद्वानों एवं लेखकों द्वारा रचित पुस्तकांे, लेखों तथा अन्य अध्ययन सामग्री का प्रयोग किया गया।
आचार्य जी मातृभाषा व राष्ट्रभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने के पक्षधर थे। उनका यह मानना था कि हाईस्कूल तक की शिक्षा मातृभाषा में हो और ऐसा सभी लोग मानते हैं। उनका कहना था कि- जिस प्रकार राष्ट्र भाषा को उच्चतर शिक्षा के माध्यम के रूप में स्वीकार कर लेने से सारे देश के लिए विचार करने और उसे व्यक्त करने के लिए एक माध्यम मिल जायेगा, उसी प्रकार एक लिपि द्वारा अर्न्तप्रान्तीय एकता की भावना उत्पन्न करने और उसे अग्रसर करने में सहायता मिलेगी।
आचार्य जी अनुशासन को शिक्षा के लिये आवश्यक मानते थे। उनके अनुसार-प्राचीन अनुशासन, पद्धति आध्ुनिक लोकतांत्रिक युग के लिये उयुक्त नहीं है। वे चाहते थे कि विद्यार्थियों में स्वाशासन की भावना पुष्ट किया जाये, उनमें सामाजिक प्रबन्ध की क्षमता पैदा की जाये, स्कूल के अनुशासन और प्रबन्ध के स्तर को ऊँचा उठाया जाये। आचार्य जी के अनुसार अनुशासन स्थापित करने के प्राचीन तरीकों का त्याग करके हमे आधुनिक तथा मनोवैज्ञानिक तरीकों को अपनाना चाहिये जिससे छात्रों में लोकतांत्रिक भावना का विकास हो सके तथा वे स्वयं अनुशासित हो सकें।
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Pages:8-10
How to cite this article:
महेन्द्र प्रताप सिंह पटेल, डॉ. रूपाली "आचार्य नरेन्द्र देव जी के शिक्षा का माध्यम तथा अनुशासन संबंधी विचारों का अध्ययन तथा उसकी सार्थकता". National Journal of Advanced Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 8-10
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